Sunday, October 20, 2019

2-199 करसिद्धेश्वर मंदिर रामगिरि होसदुर्ग चित्रदुर्ग कर्नाटक

होसदुर्ग से 25 कि.मी. दूर रामगिरि नामक एक पहाड़ी है। श्रीराम ने लंका जाते समय भगवान शिव की पूजा की थी। इसलिए पहाड़ी का नाम रामगिरि तथा मंदिर का नाम रामेश्वर है।

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2-204 रामेश्वर रामनाथपुरा

श्रीराम ने किष्किंधा के बाद कावेरी नदी के साथ-साथ सेना सहित लम्बी यात्रा की थी। तभी उन्होंने यहाँ शिवलिंग की स्थापना की थी। इस स्थान को श्रीराम के दो बार सान्निध्य का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। वा.रा. 6/4/9 से आगे पूरे अध्याय मानस 5/34/2 से 5/34/छं 2 तक नोटः रामेश्वर तथा लक्ष्मणेश्वर पास ही है लक्ष्मणेश्वर […]

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2-207 धनुष कोटि, मेलुकोटे

वानर सेना ने मेलुकोटे नामक स्थान पर जलपान किया था। नगर से 3 कि.मी. दूर जंगल में एक पहाड़ी पर श्रीराम के बाण द्वारा बनाया गया जल स्रोत आज भी है। वा.रा. 6/4/9 से आगे पूरे अध्याय मानस 5/34/2 से 5/34/छं 2 तक धनुष कोटि से शिव मंदिरः- मेलुकोटे- मलवली-सत्यगाला, एस.एच 47 – 95 कि.मी.

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2-193 हनुमान मंदिर, हनुमान हल्ली कोपल कर्नाटक

कन्नड़ में हल्ली का अर्थ है गाँव। यहाँ हनुमानजी तथा श्रीराम का मिलन हुआ था। पास ही एक पर्वत पर हनुमानजी की माँ अंजना देवी का मंदिर है।

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2-194 ऋष्यमूक पर्वत, हम्पी कोपल कर्नाटक

सुग्रीव तथा श्रीराम, लक्ष्मण का मिलन हम्पी में ऋष्यमूक पर्वत पर हुआ था। तब सुग्रीव बाली के भय से यहीं रहते थे। यहाँ पहाड़ी में एक कंदरा को सुग्रीव गुफा कहा जाता है। वा.रा. 3/54/1 से 4 तक 4/2, 5, 6, 7, 8, 10, 11 पूरे अध्याय 4/12/1 से 13, मानस 4/0/1 4/6/12

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2-195 चिन्तामणि अनागुंडी कोपल कर्नाटक

चिन्तामणि अनागुंडी तुंगभद्रा नदी यहाँ धनुषाकार घुमाव लेती है। नदी के एक ओर बाली-सुग्रीव का युद्ध हुआ था तथा दूसरे किनारे पर वृक्षों की ओट से श्रीराम ने बाली को बाण मारा था। यहां श्रीराम के चरण चिह्न हैं।

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2-196 किष्किंधा अनागुन्डी हम्पी कोपल कर्नाटक

हम्पी अनागुन्डी गाँव ही प्राचीन किष्किंधा है। यहाँ वाल्मीकि रामायण में वर्णित दृश्य मिलते हैं। अन्य महत्त्वपूर्ण स्थलों में यहाँ बाली का भंडार, अंजनी पर्वत, वीरूपाक्ष मंदिर,कोदण्डराम मंदिर, मतंग पहाड़ी दर्शनीय हंै। महत्त्वपूर्ण यह भी है कि राजवंश स्वयं को अंगद का वंशज मानता है

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2-197 प्रस्रवण पर्वत बिल्लारी कर्नाटक

श्रीराम ने वर्षा के चार महीने प्रस्रवण चोटी पर बिताये थे तथा वहीं से सीताजी का पता पाकर लंका के लिए प्रस्थान किया था। हम्पी से 4 कि.मी. दूर माल्यवंत पर्वत की चोटी का नाम प्रस्रवण चोटी है। यहाँ एकमात्र विग्रह मिला है जहाँ श्रीराम ने धनुष धारण नहीं कर रखा।

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2-198 स्फटिक शिला बेल्लारी कर्नाटक

अंतराष्ट्रीय धरोहर के रूप में ख्याति प्राप्त हम्पी त्रेतायुगीन महत्वपूर्ण स्थल है । हंपी से कुछ दूरी पर अवस्थित प्रस्रवण पर्वत और स्फटिक शिला रामायण काल से जुड़े तीर्थ हैं । स्फटिक शिला वह पावन पत्थर है जिस पर बैठकर राम जी ने वानर और भालुओं के साथ मिलकर लंका अभियान की शुरुआत की थी […]

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