Sunday, October 20, 2019

अयोध्याजी का इतिहास



बाबा राम लखन शरण एवं अन्य विद्वत जनों के लेख पर आधारित विवरण

सात मोक्षदायिनी नगरियों में प्रथम नगरी अयोध्याजी सत्युग में महाराज मनु ने बसाई थी। सरयू नदी के किनारे बसी यह नगरी 12 योजन (144 कि. मी.) लम्बी तथा 3 योजन (36 कि. मी.) चैड़ी थी। चक्रवर्ती सम्राट दशरथ जी ने इसे विशेष रूप से बसाया था।

इसमें सभी प्रकार के बाजार थे तथा इसकी रक्षा खाइयों, किवाड़ों तथा तोपों से होती थी। महाराज इक्षवाकु बाण, अरण्य, मानधाता प्रसेनजित, भरत, सगर, अंशुमान, दिलीप, भगीरथ, ककुत्स्थ, रघु, अम्बरीश जैसे सम्राटों की राजधानी रही है। श्रीराम जी की आज्ञा से इसके प्रधान देवता हनुमान जी हंैं।

श्रीराम के परमधाम पधारने पर यह नगरी जन शून्य हो गयी थी तब महाराज कुश ने इसे पुनः बसाया था। यह पावन नगरी पुनः लुप्त हो गयी थी तब लगभग 2500 वर्ष पूूर्व उज्जयिनी के सम्राट विक्रमादित्य ने इसकी खोज कर पुनः बसाया।


1528 में बाबर के सेनापति मीरबांकी ने यहां श्रीराम मंदिर ध्वस्त किया तभी से हिन्दू जनता, राजा तथा संत समाज इसकी मुक्ति के लिए संघर्षरत रहे हैं। संघर्ष का लम्बा इतिहास संक्षेप में इस प्रकार हैः-

  • हसवर के स्वर्गीय राजा रणविजय सिंह की महारानी जयराज कुमारी ने 30 हजार स्त्री सैनिकों के साथ मंदिर पर पुनः अधिकार किया। उनके गुरू स्वामी रामेश्वरानंद ने हिंदू जनजागरण किया। किन्तु तीसरे दिन हुमायँू की सेना आ गई और पुनः मुसलमानों का कब्जा हुआ।
  • अकबर के समय में हिन्दुओं ने 20 बार आक्रमण किया, किन्तु 19 बार असफल रहे। 20वीं बार रानी और उनके गुरू बलिदान हो गये किन्तु हिन्दुओं ने चबूतरे पर कब्जा कर राम मंदिर बनाया।
  • जहाँगीर व शाहजहाँ के समय शांति रही।
  • औरंगजेब ने जाँबाज के नेतृत्व में सेना भेजी तब स्वामी वैष्णव दास के दस हजार चिमटाधारी साधुओं ने मुगल सेना को भगा दिया। तब औरंगजेब ने प्रधान सेनापति सैयद हसन अली खाँ के साथ 50 हजार सैनिक भेजे। किन्तु वैष्णव दास के चिमटाधारी शिष्यों तथा गुरूगोविन्द सिंह के सिख वीरों ने सेनापति सहित मुगल सेना का संहार किया। 4 वर्ष तक औरंगजेब ने हिम्मत नहीं की। किन्तु चार वर्ष बाद अचानक हमला कर मुगल सेना ने पुनः कब्जा कर लिया।
  • नवाब सआदत अली के समय अमैठी के राजा गुरूदत्त सिंह ने नवाब के साथ घोर संग्राम कर पुनः हिन्दुओं का कब्जा करवाया।
  • राजा देवी बक्ष सिंह ने नसिरूद्दीन हैदर के साथ सात दिन तक संग्राम कर उसे पराजित किया।
  • इस प्रकार श्री राम जन्म भूमि पर हिन्दुओं तथा मुसलमानांे का बार-बार कब्जा होता रहा।
  • 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मीर अली तथा रामशरण दास ने मिल कर शांति पूर्वक श्री राम जन्म भूमि हिन्दुओं को सौंपने का प्रयत्न किया। किंतु अंग्रेजों की फूट डालो नीति ने इसे सफल नहीं होने दिया।
  • अंगे्रजी शासन काल में 1912-13 में हिन्दुओं ने दो बार आक्रमण किया किन्तु सफल नहीं रहे।
    श्री राम जन्मभूमि के लिए 76 प्रमुख युद्ध इस प्रकार हुए हैंः-
  • बाबर 1528-1530 1. भीटी नरेश, महताब सिंह
    2. हसबर के राजगुरू देवीदीन पाण्डे
    3. हसबर के राजा रणविजय सिंह 4. हसबर की रानी जयराजकुमारी
  • हुमायूँ 1530-1556 ई. 1. साधुओं की सेना लेकर स्वामी महेशानन्द जी
    2. स्त्रियों की सेना लेकर रानी जयराजकुमारी
  • अकबर 1556-1606 ई. 1. स्वामी बलरामाचार्य जी निरंन्तर लड़ते रहे।
  • औरंगजेब 1658-1707 ई. 1. बाबा वैष्णवदास, 2. गुरू गोविन्द सिंह,
    3. कुँवर गोपाल सिंह, 4. ठाकुर जगदम्बा सिंह,
    5. ठाकुर गजराज सिंह
  • अवध के नवाब सआदतअली 1. आमेठी के राजा गुरूदत सिंह
    1770-1814 ई. 2. पिपरा के राजा कुमार सिंह
  • नासिरूदीन हैदर 1814-1836 ई. 1. मकरही के राजा
  • वाजिदअली शाह 1. बाबा उद्धवदास तथा श्रीरामचरण दास
  • 1847-1857 ई 2. गोण्डा नरेश देवी बख्श सिंह
  • अंग्रेजों के शासन काल में 1. साधु समाज और हिन्दू जनता
  • 1912-13 सम्मिलित रूप से
  • 1-2-1986 को न्यायालय के आदेश से श्री राम जन्मभूमि का ताला खुला तथा हिन्दुओं को पूजन और दर्शन की अनुमति मिली।
  • 6/12/1992 को आन्दोलनरत्त हिन्दू जनता ने बाबरी ढाँचा ध्वस्त कर दिया अब यहाँ दर्शन व पूजन हो रहे हैं।
  • अयोध्या जी में दर्शनीय स्थल इस प्रकार हैं:-
  • सरयू जी, स्वर्ग द्वार तीर्थ, नागेश्वर नाथ मंदिर, कालेराम मंदिर, हनुमान गढ़ी, श्री राम जन्म भूमि, सीता कूप, कनक भवन, रत्न सिंहासन, मतगजेन्द्र, सप्तसागर, लक्ष्मण मंदिर, लक्ष्मण किला, त्रैतानाथ का मंदिर, वशिष्ठ कुण्ड, विद्या कुण्ड, सूर्य कुण्ड, मणि पर्वत, दुर्गा देवी काली, निर्मली कुण्ड, गुप्तार घाट, मखोड़ा, बिल्बहरि घाट, नंदी ग्राम, आयोध्या शोध संस्थान तुलसी स्मारक
  • साभारः-
  • श्रीराम जन्म भूमि-ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक साक्ष्य लेखक ठाकुर प्रसाद वर्मा एवं स्वराज प्रकाश गुप्त
  • मंदिर वहीं बनाएंगे मगर क्यों लेखक बृजगोपाल राय, चंचल रजत जयंति विशेषांक, हिन्दू विश्व
  • अयोध्या महात्म्य लेखक यशवंत राव देशपाण्डे श्री कालेराम मंदिर ट्रस्ट

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