Wednesday, November 30, 2022

2-223 दर्भशयनम त्रिपुल्लाणी ( आदि रामेश्वर ) रामनाथपुरम तमिलनाडु


त्रिपुल्लाणी समुद्र तट पर पहुँच कर श्रीराम समुद्र से रास्ता लेने के लिए तीन दिन तक तपस्यारत पृथ्वी पर लेटे रहे। यहीं श्रीराम ने शिवलिंग की स्थापना की थी। इसे आदि रामेश्वर माना जाता है। यहीं समुद्र ने प्रकट होकर श्रीराम को पुल बनाने की युक्ति बतायी थी।

वा.रा. 6/21 पूरे अध्याय 6/22/48 से 87 तक, मानस 5/49/3 से 5/50/4 5/57 दोहे से 6/1/1 यही संदर्भ सेतु के अवषेषों से भी 

संबंधित है।

दर्भशयनम से सेतु अवशेषः- 

त्रिपुल्लाणी-चक्रतीर्थ-छेदुकरई। 3 कि.मी.

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