Friday, August 19, 2022

2-119 शिव मंदिर केशकाल घाटी


शिव मंदिर कांकेर से 15-20 कि.मी. आगे दुर्गम घाटी के ऊपर जंगल में बहुत विशाल शिवलिंग हैं तथा सरोवरों का निर्माण किया गया है। श्रीराम वनवास काल में यहाँ आये थे।
ग्रंथ उल्लेख व आगे का मार्ग
वा.रा. 3/7, 8 दोनों पूरे अध्याय 3/11/28 से 44 तक, मानस 3/9/1 से 3/11 दोहे तक। विशेष टिप्पणीः श्री रामचरित मानस के अनुसार श्रीसीता राम जी सुतीक्षण मुनि आश्रम से सीधे अगस्त्य मुनि के आश्रम (अगस्त्येश्वर मंदिर) गये। अतः वहाँ तक मानस से कोई संदर्भ नहीं मिलते। गोस्वामी जी द्वारा वर्णित सकल मुनि (मा.3/9 दोहा) दण्डक वन में थे। उनकी चर्चा जन श्रुतियों के 
आधार पर ही करेंगे। क्योंकि उन सकल मुनियों के नाम, ग्राम, आश्रम आदि का कोई वर्णन नहीं दिया है। हां जन श्रुतियों में वे आश्रम आज भी जीवंत है तथा उनके सभी स्थलों पर अवशेष तथा लोक कथाएँ मिलती हैं।रामायण के अरण्य काण्ड के 8,9,10 अध्यायों के अनुसार श्रीराम सुतीक्ष्ण आश्रम से प्रस्थान करते हैं। मार्ग में राक्षसों के वध संबधी प्रतिज्ञा पर मां सीता  से श्रीराम चर्चा करते हैं। इन अध्यायों में केवल यही चर्चा हैं। मार्ग का कोई संकेत नहीं है। इन दस वर्षों में प्रथम संकेत पंचाप्सर का मिलता है। अतः अब उनका विवरण देखते हैं। विशेष संकेत के रूप में वा.रा. 3/11/21 से 28 तक देखें।
केशकाल से राकसहाडाः- केशकाल- पिपरा वहीगांव-फर्श बाजार-सिंगारपुरी -जैतपुरी-कोंडागांव-कोकाड़ी-चीमा-नारायण पुर-गढ़वेंगल। राष्ट्रीय राजमार्ग 43, व राष्ट्रीय राजमार्ग 130बी से 106 कि.मी.नोट: केशकाल के बाद रक्शा डोंगरी, राकस हाड़ा तथा शिव मंदिर तोड़मा जाने से पहले यात्री मार्ग तथा स्थानीय परिस्थितियों की विवेचना स्वयं करें।टिप्पणीः- विशेष कारणों से 120, 121, 122, 123 इन स्थलों पर जाना अभी सुरक्षित नहीं है। यात्री मार्ग तथा अन्य समस्याओं के लिए स्थानीय सूत्रों से परामर्श कर आगे बढे़। वर्तमान में यात्रा का क्रम संख्या 119 से  क्रम संख्या 123 पर सीधा जाना चाहिए।

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