Sunday, October 20, 2019

वनवासी राम और लोक संस्कृति


डॉ राम अवतार के शोध पर आधारित यह ग्रंथ भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले लोगों के लिये एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत है । भारतीय ग्रामीण जीवन, विशेष रूप से वनवासी लोगों पर, रामजी के प्रभाव का इस पुस्तक में गहन विवेचन हुआ है ।

इस ग्रंथ के लेखन के लिये राम अवतार ने अनेक वर्षों तक भारत वर्ष के विभिन्न प्रांतों के वनों में रहने वाले लोगों से मिलकर राम जी के बारे में लगातार तथ्यों का संकलन किया । एक स्थान के तथ्यों का मिलान जब दूसरे स्थान के तथ्यों के साथ किया गया तो वनवासी राम के बारे में परस्पर एक दूसरे से जुड़े अलग – अलग जनविश्वास कड़ी दर कड़ी शृंख्लाबद्ध होते चले गये । इन सबको मिलाकर रामजी का वनवास पथ एक माले के मनकों की तरह आपस में जुड़कर एक प्रशस्त मार्ग के रूप में विकसित हो गया ।

256 पृष्ठों वाला यह ग्रंथ 5 खंडों में विभक्त है । इसके प्रथम खण्ड में अयोध्याजी का इतिहास, श्रीराम का प्राकट्य, जन्म कुंडली और अन्य तथ्यों पर विचार किया गया है । दूसरे खण्ड में सद्गुरु की कृपा और श्री राम की यात्राओं के बारे में जानकारी दी गयी है । मुनि विश्वामित्र के साथ रामजी की अयोध्या से जनकपुर यात्रास्थलों की जानकारी इस खंड में उपलब्ध है ।

पुस्तक के तीसरे खंड में वनवासी राम के विविध पक्षों पर विचार करते हुए शोधक्रम में मिले तीर्थों की जानकारी दी गयी है । चौथे खंड में श्री राम की यात्रा में ऋषियों की भूमिका, नदियों का महत्व और तीर्थ यात्रा के फल के बारे में विवेचना की गयी है । तीर्थयात्रियों के लिये सावधानियां एक अत्यंत उपयोगी अध्याय है जिसका लाभ इन स्थानों पर जाने वाले तीर्थयात्री उठा सकते हैं ।

पांचवे खंड में श्री राम वन यात्रा और संस्कृति के बारे में सम्यक जानकारी दी गयी है । विभिन्न स्थानों पर राम की पूजा और उपासना पद्धति, धार्मिक कार्य, प्रथायें , लोक कथा, लोकगीत और वनवासियों के बीच श्री राम के अलग अलग रूपों में स्मृतियों की जानकारी इस खंड में उपलब्ध है ।

यह पुस्तक हर घर में संग्रहणीय है । श्वेत श्याम चित्रों से यथास्थान सुसज्जित इस ग्रंथ का मूल्य 600 रुपये है ।

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