Thursday, February 9, 2023

1-34 रत्न सागर जनकपुर नेपाल


लोक मान्यता के अनुसार राजा जनक ने चारों दामादों, बेटियों तथा समधी जी राजा दशरथ जी को दहेज में असीम धन, रत्नादि दिये थे। आज की ही भाँति तब भी दहेज दिखाया जाता था। यहां दहेज अवलोकनार्थ रखा गया था। तब यह सागर रत्नों से भर गया था इसलिए आज भी इसे रत्न सागर कहा जाता है।

वा.रा. 1/70, 71, 72, 73 पूरे अध्याय, मानस 1/212/4,1/286/3 से 1/288/2, 3, 4, 1/313/3, 1/319 छंद 1/321/छन्द, 1/322/4 से 1/324/छ-4

Sharing is caring!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *