Tuesday, December 10, 2019

न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक


श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास द्वारा भगवान राम के यात्रा स्थलों से संबंधित अनेक पुस्तक प्रकाशित किये गये हैं । इनमें एक पन्ने के पत्रक से लेकर सैकड़ों पृष्ठ वाले ग्रंथ सम्मिलित हैं । इनका विवरण इस प्रकार हैः-

पत्रक

ये पत्रक ए 4 आकार का है । इसमें 290 तीर्थ स्थानों के नाम, स्थान , जिला और प्रान्त के नाम सम्मिलित किये गये हैं । यह निःशुल्क वितरण के लिये तैयार किया गया है । दस रूपये का टिकट लगा लिफाफा भेजने पर यह पत्रक आपको भारत में कहीँ भी भेजा जा सकता है । पत्रक प्राप्त करने के लिये डाक टिकट लगा 23 X 10 सेंटीमीटर का लिफाफा अपने पते के साथ न्यास को भेजें । हम यथाशीघ्र आपको पत्रक भेजेंगे ।

यह पत्रक दानदाताओंं के सहयोग से छपाया जाता है । आप अपनी ओर से छपवा कर यह पत्रक राम भक्तों में निःशुल्क वितरण कर सकते हैं । दानादाताओं का संक्षिप्त विवरण और सौजन्य पत्रक पर प्रकाशित किया जायेगा।

जहँ जहँ चरण पड़े रघुवर के ( श्री राम यात्रा स्थलों की चित्रमय झलक )

हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में यह ग्रंथ प्रकाशित हुआ है । विक्रमी संवत 2067 के ज्येष्ठ महीना तदनुसार जून 2010 में इस ग्रंथ का प्रथम संस्करण प्रकाशित हुआ । सहयोग राशि 1650 रुपये देकर यह पुस्तक न्यास कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है ।

374 पृष्ठों वाले इस ग्रंथ में 290 तीर्थ स्थानों के नाम, स्थान, जिला और प्रान्त दर्शाते हुए देशांतर और अक्षांश सहित सुंदर रंगीन चित्रों के साथ प्रकाशित हुए हैं । डॉ राम अवतार ने जीपीएस यंत्र के साथ प्रत्येक स्थल का विवरण दर्ज किया जो इस ग्रंथ में एक परिशिष्ट के रूप में उपलब्ध है ।

इसके अलावा प्रत्येक तीर्थ का डाकघर , निकटवर्ती बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा जैसी जानकारियाँ भी दी गयी हैं ताकि तीर्थयात्री आसानी से वहां पहुँच सके । यात्री जिन स्थानों पर रात्रि विश्राम कर सकते हैं उसकी सूचना भी एक तालिका में प्रस्तुत की गयी है ।

यह ग्रंथ भगवान राम के तीर्थों के बारे में एक प्रामाणिक दस्तावेज के रूप में रामभक्त परिवार में पूजा घर में रखने योग्य है ।

वनवासी राम और लोक संस्कृति

डॉ राम अवतार के शोध पर आधारित यह ग्रंथ भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले लोगों के लिये एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत है । भारतीय ग्रामीण जीवन, विशेष रूप से वनवासी लोगों पर, रामजी के प्रभाव का इस पुस्तक में गहन विवेचन हुआ है ।

इस ग्रंथ के लेखन के लिये राम अवतार ने अनेक वर्षों तक भारत वर्ष के विभिन्न प्रांतों के वनों में रहने वाले लोगों से मिलकर राम जी के बारे में लगातार तथ्यों का संकलन किया । एक स्थान के तथ्यों का मिलान जब दूसरे स्थान के तथ्यों के साथ किया गया तो वनवासी राम के बारे में परस्पर एक दूसरे से जुड़े अलग – अलग जनविश्वास कड़ी दर कड़ी शृंख्लाबद्ध होते चले गये । इन सबको मिलाकर रामजी का वनवास पथ एक माले के मनकों की तरह आपस में जुड़कर एक प्रशस्त मार्ग के रूप में विकसित हो गया ।

256 पृष्ठों वाला यह ग्रंथ 5 खंडों में विभक्त है । इसके प्रथम खण्ड में अयोध्याजी का इतिहास, श्रीराम का प्राकट्य, जन्म कुंडली और अन्य तथ्यों पर विचार किया गया है । दूसरे खण्ड में सद्गुरु की कृपा और श्री राम की यात्राओं के बारे में जानकारी दी गयी है । मुनि विश्वामित्र के साथ रामजी की अयोध्या से जनकपुर यात्रास्थलों की जानकारी इस खंड में उपलब्ध है ।

पुस्तक के तीसरे खंड में वनवासी राम के विविध पक्षों पर विचार करते हुए शोधक्रम में मिले तीर्थों की जानकारी दी गयी है । चौथे खंड में श्री राम की यात्रा में ऋषियों की भूमिका, नदियों का महत्व और तीर्थ यात्रा के फल के बारे में विवेचना की गयी है । तीर्थयात्रियों के लिये सावधानियां एक अत्यंत उपयोगी अध्याय है जिसका लाभ इन स्थानों पर जाने वाले तीर्थयात्री उठा सकते हैं ।

पांचवे खंड में श्री राम वन यात्रा और संस्कृति के बारे में सम्यक जानकारी दी गयी है । विभिन्न स्थानों पर राम की पूजा और उपासना पद्धति, धार्मिक कार्य, प्रथायें , लोक कथा, लोकगीत और वनवासियों के बीच श्री राम के अलग अलग रूपों में स्मृतियों की जानकारी इस खंड में उपलब्ध है ।

यह पुस्तक हर घर में संग्रहणीय है । श्वेत श्याम चित्रों से यथास्थान सुसज्जित इस ग्रंथ का मूल्य 600 रुपये है ।

जहँ जहँ राम चरण चलि जाहिँ ( श्री राम यात्रा पथ )

यह न्यास द्वारा प्रकाशित सबसे लोकप्रिय पुस्तक है जिसके अबतक नौ संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं । 130 पृष्ठों वाले इस ग्रंथ में 290 तीर्थ स्थानों के नाम, स्थान, जिला और प्रान्त दर्शाते हुए सुंदर रंगीन चित्रों के साथ प्रकाशित हुए हैं । सभी स्थानों के बारे में संक्षिप्त जानकारी, अगले तीर्थ तक पहुँचने के लिये समुचित मार्ग दिया गया है ।

श्री राम वनगमन तीर्थ की यात्रा करने वाले श्रद्धालु इस पुस्तक के सहारे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँच जाते हैं । इसी कारण वश इस पुस्तक की मांग हर समय बनी रहती है । इस पुस्तक की सहयोग राशि 150 रुपये है ।

इस विवरण के आरंभ में सबसे ऊपर इसी पुस्तक का आवरण चित्र प्रकाशित किया गया है । प्रत्येक रामभक्त को अपने आराध्य के लीला स्थलों की जानकारी रखनी ही चाहिये । अपनी प्रति आप अभी मंगायें ।

पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क करें

श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास

बी 945 चित्रकूट एम आइ जी फ्लैट्स

पूर्वी लोनी रोड दिल्ली 11064

मोबाइल संपर्क 09868364356 08920301889

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2 responses to “न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक”

  1. PANKAJ SHARMA says:

    I want to buy these 2 books “VANWASI RAM AUR LOK SANSAKRITI” and “JAH JAH CHARAN PADE RAGHUVAR KE”. Kindly message me how to and where to buy these books.

  2. Manoj Phatak says:

    Dear Sir
    If you are living in Delhi then you can contact our office and purchase the book. If you are living outside Delhi then you will get it through post. Please contact Dr Ramautar ji at 09868364356 and 08920301889 for details.

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